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    Jai Bateshwar Nath!
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    Bateshwar Ghat : Temples of Shiva

Sunday, February 1, 2015

बटेश्वर मेला

बटेश्वर मेले का आयोजन आगरा से लगभग 70 किमी0 की दूरी पर स्थित प्रसिद्ध पौराणिक धार्मिक स्थल बटेश्वर में प्रतिवर्ष कार्तिक मास में दीपावली से लगभग एक सप्ताह पूर्व आयोजित किया जाता है, जो पूरे एक माह चलता है।शिव का एक नाम पशुपति भी है, बटेश्वर का पशुमेला इसे सार्थक करता है। बटेश्वर का पशुओं का मेला पूरे भारत में प्रसिद्ध है।
बटेश्वर मेला त्तर भारत का एक महत्वपूर्ण बड़ा पशु मेला है यह मेला जितना प्राचीन है, उतना ही विख्यात भी। इस मेले का आनन्द लेने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।

किसी समय इस मेले में बरमा के हाथी, पेशावर के ऊँट और काबुल के घोड़े बिकने आते थे। किंतु अब मेले ने दूसरा रूप ले लिया है, फिर भी उत्तर भारत का यह पशुओं का सबसे बड़ा मेला है। बटेश्वर की गुझिया, खोटिया, बताशा और शक्कर-पारे  प्रसिद्ध हैं।
मेले के अवसर पर यहाँ बहुत चहल-पहल रहती है, पशुमेला तीन चरणों में पूरा होता है। पहले चरण में ऊँट, घोड़े और गधों की बिक्री होती है, दूसरे चरण में गाय आदि अन्य पशुओं की तथा अंतिम चरण में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। मेला शुरू होने के एक सप्ताह पहले से ही पशु-व्यापारी अपने पशु लेकर यहां पहुँचने लगते हैं। मेले में पशुओं की विभिन्न प्रकार की दौड़ों का आयोजन भी किया जाता है।

Saturday, June 8, 2013

शिव यात्रा

एक बार भगवान शिव और उनकी पत्नी, पार्वती, वाहन नंदी बैल के साथ बटेश्वर से यात्रा पर निकले। पार्वती जी ने जवान और खूबसूरत सुन्दरी का रूप लिया, जबकि प्रभु बटेश्वरनाथ शिव ने, एक बूढ़े आदमी का रूप ले लिया।. सड़क पर सभी राहगीरों द्वारा एक बूढ़े आदमी और एक युवा महिला की इस अजीब जोड़ी को विस्मय के साथ पर देखा।

Bateshwar.blogspot.inरास्ते में शिव ने पार्वती जी को बैल की सवारी करने को कहा,पार्वती जी नंदी पर बैठ गयी और शिव जी साथ-साथ चलने लगे। राहगीर व गांववाले ये देख कर आलोचना करने लगे "क्या स्वार्थी औरत है वह युवा और स्वस्थ है और फिर भी वह बूढ़े आदमी को पैदल चलने के लिए मजबूर करते हुए आराम से सवारी कर रही है।" ऐसा सुन कर शिव जी ने कहा ''पार्वती देवी, लोगों आप का मजाक उड़ा रहे हैं. "समझदारी इसी में है की में नंदी पर बैठता हूँ और आप साथ-साथ पैदल चलो।" और शिव जी बैठ गए, आगे जाने पर अन्य राहगीर शिव को कोसने लगे ''ये आदमी मोटा-मजबूत और क्रूर है. इस युवा और सौम्य महिला को पैर पर चलने के लिए मजबूर कर रहा है, जबकि खुद सवारी का आनंद ले रहा है।''

यह सुनकर शिवजी और पार्वती दोनों बैल पर चढ़ गए, कम से कम, इन आलोचनाओं से छुटकारा मिलेगा लेकिन वे गलत थे और जैसे ही वे अगले गांव में पहुचे लोगों व्यंगात्मक मुस्कान के साथ चुटकी लेने लगे ''इस निर्लज दम्पति को देखो दोनों निर्दयता से बैल पर चढ़े बेठे है ये इस गरीब प्राणी को मार ही डालेगे।''

अब केवल एक ही विकल्प था। वे बैल से उतर गए और दोनों नंदी के साथ-साथ पैदल चलने लगे, राह में नए लोगों से मुलाकात हुई वे उन पर हंस रहे थे कुछ कहने लगे "क्या मूर्ख है वाहन के रूप में एक बैल ले लिया है और उपयोग नहीं कर रहे है।''

अब शिव जी ने पार्वती जी से कहा की दुनिया की आलोचना-सराहना की परवाह न करते हुए हमें जो ठीक लगे वही करना चाहिए। इस दुनिया में, हम कोई काम अच्छा भले ही करे वह सबको पसंद नहीं आएगा और ना ही सब समर्थन करेंगे। समस्या यह है,कि हमारी दुनिया की प्रकृति यही है. एक साधु चमत्कार दिखाता है तो लोग कहते है ''वह काले जादू करता है और बुरी शक्तियों का उपासक है।'' और एक साधु चमत्कार से बचाता है, तो कुछ शिकायत करते है ''वह कोई चमत्कार नहीं कर सकता वह साधारण है और किसी काम का नहीं है।'' यह हमारी दुनिया की मानसिकता है जो कुछ भी आप करे उसमें दोष निकाला ही जाएगा। दुनिया वाले आप को सीधे कभी नहीं देखेंगे। इसलिए, सांसारिक लोगों के शब्दों पर ध्यान नहीं देते हुए श्रद्धापूर्वक भगवान की पूजा जारी रखे।

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