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    Jai Bateshwar Nath!
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    Bateshwar Ghat : Temples of Shiva

Saturday, June 8, 2013

शिव यात्रा

एक बार भगवान शिव और उनकी पत्नी, पार्वती, वाहन नंदी बैल के साथ बटेश्वर से यात्रा पर निकले। पार्वती जी ने जवान और खूबसूरत सुन्दरी का रूप लिया, जबकि प्रभु बटेश्वरनाथ शिव ने, एक बूढ़े आदमी का रूप ले लिया।. सड़क पर सभी राहगीरों द्वारा एक बूढ़े आदमी और एक युवा महिला की इस अजीब जोड़ी को विस्मय के साथ पर देखा।

Bateshwar.blogspot.inरास्ते में शिव ने पार्वती जी को बैल की सवारी करने को कहा,पार्वती जी नंदी पर बैठ गयी और शिव जी साथ-साथ चलने लगे। राहगीर व गांववाले ये देख कर आलोचना करने लगे "क्या स्वार्थी औरत है वह युवा और स्वस्थ है और फिर भी वह बूढ़े आदमी को पैदल चलने के लिए मजबूर करते हुए आराम से सवारी कर रही है।" ऐसा सुन कर शिव जी ने कहा ''पार्वती देवी, लोगों आप का मजाक उड़ा रहे हैं. "समझदारी इसी में है की में नंदी पर बैठता हूँ और आप साथ-साथ पैदल चलो।" और शिव जी बैठ गए, आगे जाने पर अन्य राहगीर शिव को कोसने लगे ''ये आदमी मोटा-मजबूत और क्रूर है. इस युवा और सौम्य महिला को पैर पर चलने के लिए मजबूर कर रहा है, जबकि खुद सवारी का आनंद ले रहा है।''

यह सुनकर शिवजी और पार्वती दोनों बैल पर चढ़ गए, कम से कम, इन आलोचनाओं से छुटकारा मिलेगा लेकिन वे गलत थे और जैसे ही वे अगले गांव में पहुचे लोगों व्यंगात्मक मुस्कान के साथ चुटकी लेने लगे ''इस निर्लज दम्पति को देखो दोनों निर्दयता से बैल पर चढ़े बेठे है ये इस गरीब प्राणी को मार ही डालेगे।''

अब केवल एक ही विकल्प था। वे बैल से उतर गए और दोनों नंदी के साथ-साथ पैदल चलने लगे, राह में नए लोगों से मुलाकात हुई वे उन पर हंस रहे थे कुछ कहने लगे "क्या मूर्ख है वाहन के रूप में एक बैल ले लिया है और उपयोग नहीं कर रहे है।''

अब शिव जी ने पार्वती जी से कहा की दुनिया की आलोचना-सराहना की परवाह न करते हुए हमें जो ठीक लगे वही करना चाहिए। इस दुनिया में, हम कोई काम अच्छा भले ही करे वह सबको पसंद नहीं आएगा और ना ही सब समर्थन करेंगे। समस्या यह है,कि हमारी दुनिया की प्रकृति यही है. एक साधु चमत्कार दिखाता है तो लोग कहते है ''वह काले जादू करता है और बुरी शक्तियों का उपासक है।'' और एक साधु चमत्कार से बचाता है, तो कुछ शिकायत करते है ''वह कोई चमत्कार नहीं कर सकता वह साधारण है और किसी काम का नहीं है।'' यह हमारी दुनिया की मानसिकता है जो कुछ भी आप करे उसमें दोष निकाला ही जाएगा। दुनिया वाले आप को सीधे कभी नहीं देखेंगे। इसलिए, सांसारिक लोगों के शब्दों पर ध्यान नहीं देते हुए श्रद्धापूर्वक भगवान की पूजा जारी रखे।

Saturday, January 21, 2012

किंवदंति : लिंग परिवर्तन

Bateshwarहम जानते हैं कि लिंग परिवर्तन की किंवदंति भारतीय लोक कथाओं में अज्ञात नहीं हैं । हमे एक बहुत प्राचीन कथा का समरण हो आता है । ये कथा "इला" की है जो की वैवस्वत-मनु की पुत्री थी । वैवस्वत-मनु ने वरुण भगवान से पुत्र प्राप्ति के लिए प्रार्थना की,पर उनके एक पुर्त्री का जनम हुआ, क्यों की वैवस्वत-मनु की पत्नी पुत्री चाहती थी,पिता की देवताओं से प्रार्थना के परिणामस्वरूप वह पुत्री, एक पुरुष "सुद्युम्ना" में बदल गई थी और अंत में भगवन शिव उसे फिर से एक स्त्री में बदल दिया और वह उसी रूप में बुद्ध (बुद्धि) की पत्नी बन गई थी ।

आधुनिक समय में हमें भदावर के भदौरिया राजा की बेटी की बहुत इसी तरह की कहानी सुनने को मिलती है. महाराजा भदावर बदन सिंह भदौरिया और तत्कालीन राजा परमार के साथ घनिष्ठ मित्रता थी । जब उनकी रानियो ने गर्भ धारण किया तब दोनो के बीच समझौता हुआ कि जिसके भी कन्या होगी,वह दूसरे के पुत्र से शादी करेगा, राजा परमार और राजा भदावर दोनो के ही कन्या पैदा हो गई पर राजा भदावर ने अपना वचन पूरा करने के लिए राजा परमार को सूचित कर दिया कि उनके पुत्र पैदा हुआ है । उनकी झूठी बात का परमार राजा को पता नही था वे अपनी कन्या को पालते रहे और राजा भदावर के पुत्र से अपनी कन्या का विवाह करने के लिये बाट जोहते रहे । जब राजा भदावर की कन्या को पता लगा कि उसके पिता ने झूठ बोलकर राजा परमार को उसकी लडकी से शादी का वचन दिया हुआ है, तो वह अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिये भगवान शिव की आराधना बटेश्वर में करने लगी । वर्षो की प्राथना के बाद भी उसकी विनती न सुनी जाने के कारण उसने अपने पिता की लाज को बचाने हेतु यमुना नदी मे आत्महत्या के लिये छलांग लगा दी । भगवान शिव की आराधना का चम्त्कार हुआ, और वह कन्या पुरुष रूप मे इसी स्थान पर उत्पन हुई। राजा भदावर ने इस स्थान पर एक सौ एक मन्दिरों का निर्माण करवाया, मुख्य मंदिर में पवित्र शिव लिंग जो बटेश्वरनाथ नाम से प्रसिद्ध हैं । यहां पर यमुना अपने प्राकृतिक मार्ग को छोड़ चार किलोमीटर तक अर्ध-चंद्राकर उल्टी धारा के रूप मे बही हैं ।
 


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